विक्रमशीला सेतु हादसा: बड़ा खतरा टला, लेकिन सवालों के घेरे में सिस्टम
विक्रमशीला सेतु हादसा: बड़ा खतरा टला, लेकिन सवालों के घेरे में सिस्टम
विक्रमशीला सेतु — भागलपुर की जीवन रेखा माने जाने वाले इस पुल पर आज एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बताया जा रहा है कि पुल का एक हिस्सा अचानक क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे कई जिलों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।
भागलपुर को उत्तरी बिहार के नौगछिया, पूर्णिया और कटिहार से जोड़ने वाला यह अहम पुल करीब 4.7 किलोमीटर लंबा है, जिसे 23 जुलाई 2001 को आम जनता के लिए खोला गया था।
घटना के वक्त हालात बेहद गंभीर थे। अगर समय रहते सतर्कता नहीं बरती जाती, तो हजारों लोगों की जान जा सकती थी। एक ट्रक ड्राइवर की सूझबूझ ने इस बड़े हादसे को टाल दिया। नौगछिया की ओर से आ रहे ड्राइवर की नजर जैसे ही पुल में आई दरार पर पड़ी, उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रोकी और पुल निगम को सूचना दी।
सूचना मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया। डीएम और एसपी तुरंत बरारी पहुंचे और बिना देर किए पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी वाहनों को रोक दिया, जिससे बड़ा नुकसान होने से बच गया।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—
जब पुल की हालत पहले से ही खराब बताई जा रही थी और जांच की सूचनाएं भी दी गई थीं, तो आखिर जिम्मेदार विभाग क्या कर रहा था?
सूत्रों के मुताबिक, जांच टीमें आती रहीं, औपचारिक निरीक्षण हुआ और फाइलें आगे बढ़ती रहीं, लेकिन जमीनी हकीकत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
और सबसे चौंकाने वाली बात—जिस ट्रक ड्राइवर ने अपनी सूझबूझ से हजारों जिंदगियां बचाईं, उसका अब तक न कोई नाम सामने आया, न ही कोई सम्मान।
अब सवाल सीधा है—
अगर आज यह पुल पूरी तरह गिर जाता और सैकड़ों-हजारों लोगों की जान चली जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता?
क्या सिर्फ जांच और कागजी कार्रवाई से काम चल जाएगा, या फिर इस बार जिम्मेदारी तय होगी?
क्लोजिंग लाइन:
विक्रमशीला सेतु का यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी लापरवाही की चेतावनी है—जिसे अब नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
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