DDC–DRDA के चपरी पहुंचते ही प्रशासन में दिखी ‘अचानक सक्रियता’
DDC–DRDA के चपरी पहुंचते ही प्रशासन में दिखी ‘अचानक सक्रियता’
DDC–DRDA के चपरी पहुंचते ही प्रशासन में दिखी ‘अचानक सक्रियता’
बांका जिले के धोरैया प्रखंड अंतर्गत चपरी गांव में जैसे ही DDC और DRDA के आगमन की खबर फैली, पूरे प्रखंड कार्यालय में मानो बिजली दौड़ गई। जो दफ्तर आम दिनों में सुस्त नज़र आते हैं, वहां अचानक चहल-पहल बढ़ गई। अधिकारी कुर्सियों पर नजर आने लगे, फाइलें खुल गईं और कामकाज की रफ्तार देखते ही बनती थी।
यह नज़ारा अपने-आप में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है—
क्या सरकारी अधिकारियों को केवल वरीय अधिकारियों का ही डर होता है?
और क्या निरीक्षण खत्म होते ही वही पुरानी लापरवाही और मनमानी लौट आती है?
हकीकत यह है कि ऐसे दौरों के दौरान एक दिन के लिए व्यवस्था चुस्त दिखती है, लेकिन उसके बाद फिर सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट जाता है। धोरैया प्रखंड में मनरेगा विभाग से लेकर राजस्व विभाग तक भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हैं। गरीब किसान, मजदूर और जरूरतमंद लोग महीनों चक्कर लगाते हैं, लेकिन बिना “जान-पहचान” या “बिचौलिया” के काम आगे नहीं बढ़ता।
सबसे चिंताजनक भूमिका उन दलालों की है, जो खुद को अधिकारियों का खास बताकर सरकारी दफ्तरों में खुलेआम घूमते हैं। यही दलाल गरीब किसानों और आम जनता को सबसे ज़्यादा परेशान करते हैं। सरकारी योजनाएं कागजों में जनता के नाम होती हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत में इनका फायदा चंद लोगों तक सिमट जाता है।
यदि सच में राजस्व भूमि मंत्री और गृहमंत्री ईमानदारी से जनता के हित में कार्रवाई करें, तो इन बिचौलियों का पूरा नेटवर्क धराशायी हो सकता है। तब न अधिकारी निरीक्षण के डर से दिखावटी सक्रियता दिखाएंगे, न गरीबों को अपने हक के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा।
अब बड़ा सवाल यही है—
क्या DDC–DRDA का यह दौरा सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगा,
या धोरैया प्रखंड में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?
जवाब आने वाला वक्त देगा, लेकिन जनता की नजरें टिकी हैं।
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