स्थापना दिवस पर विद्यालय में उल्लास, ‘दीदी की रसोई’ बनी महिला सशक्तिकरण का उदाहरण

स्थापना दिवस पर विद्यालय में उल्लास, ‘दीदी की रसोई’ बनी महिला सशक्तिकरण का उदाहरण

Jan 21, 2026 - 20:15
Jan 21, 2026 - 22:10
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स्थापना दिवस पर विद्यालय में उल्लास, ‘दीदी की रसोई’ बनी महिला सशक्तिकरण का उदाहरण

धोरैया, बांका | 21 जनवरी 2026:
डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय, चापरी (जिला बांका) में आज स्थापना दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उप विकास आयुक्त (DDC), DRDA तथा जिला कल्याण पदाधिकारी (DWO) उपस्थित रहे।
विद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षकों के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक, शैक्षणिक और प्रेरणादायी प्रस्तुतियाँ दीं, जिसने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। बच्चों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की अतिथियों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। इस अवसर पर DDC द्वारा प्रतिभावान बच्चों को सम्मानित भी किया गया, जिससे बच्चों का उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा।
कार्यक्रम के बाद DDC ने विद्यालय परिसर में जीविका के माध्यम से संचालित “दीदी की रसोई” का निरीक्षण किया। इस दौरान शबाना परवीन, BPM धोरैया सहित जीविका के अन्य कर्मी उपस्थित रहे। जीविका दीदियों ने अधिकारियों का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें भोजन परोसा। भोजन करने के बाद DDC ने इसे एक सराहनीय पहल बताया और जीविका परिवार के प्रयासों की खुलकर प्रशंसा की।
इस अवसर पर शबाना परवीन ने जानकारी दी कि दीदी की रसोई विद्यालय से 15 जनवरी 2024 से जुड़ी हुई है। वर्तमान में इससे कुल 40 दीदियाँ जुड़ी हैं, जिनमें 26 दीदियाँ भोजन निर्माण तथा 14 दीदियाँ साफ-सफाई का कार्य कर रही हैं। इस पहल से दीदियों को अपने ही गाँव में रोजगार मिला है, जिससे उनकी आमदनी बढ़ी है और अब उनके बच्चे नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि आने वाले समय में यहाँ लॉन्ड्री सेवा भी शुरू की जाएगी, जिससे 15 से 20 और दीदियों को रोजगार मिलेगा। इससे बच्चों का समय बचेगा और वे पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
शबाना परवीन ने कहा कि शुरुआत में कुछ चुनौतियाँ जरूर थीं, लेकिन विद्यालय प्रशासन का उन्हें पूरा सहयोग मिला। उन्होंने विशेष रूप से विद्यालय के प्राचार्य का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन से विद्यालय में अनुशासन और समय की पाबंदी बनी हुई है।
कुल मिलाकर, यह स्थापना दिवस समारोह शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक सहभागिता का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया

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