कतर की गैस फील्ड तबाही पर जश्न क्यों?—मध्य पूर्व में बढ़ता खतरनाक तनाव
कतर की गैस फील्ड तबाही पर जश्न क्यों?—मध्य पूर्व में बढ़ता खतरनाक तनाव
तर की लगभग 17% गैस फील्ड की तबाही पर जश्न मनाने की कोई वजह समझ में नहीं आती। ईरान की गैस फील्ड पर हमला हुआ, और उसके जवाब में ईरान ने सऊदी अरब, कतर, यूएई और कुवैत पर हमले किए। इन हमलों में सबसे खतरनाक असर कतर पर पड़ा, जिससे उसकी गैस उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा सीधे प्रभावित हुआ है। अनुमान है कि इसकी पूरी मरम्मत में पाँच साल से ज़्यादा समय लग सकता है, और कतर को हर साल करीब 20 बिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कतर वो देश है जिसने हमेशा फिलिस्तीन का साथ दिया, हमास की मदद की, और दुनिया भर में रेजिस्टेंस समूहों के साथ खड़ा रहा। ईरान को भी कतर ने कई मौकों पर समर्थन दिया है। लेकिन इज़राइल पर सीधा हमला करने के बजाय, ईरान ने दबाव बनाने के लिए कतर को निशाना बनाया।
ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच चल रहे इस संघर्ष में बहुत से लोग ईरान के साथ सहानुभूति रखते हैं और उसकी कामयाबी की दुआ करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जंग का दायरा अरब देशों तक फैला दिया जाए या कतर और सऊदी अरब की तबाही पर खुशी जताई जाए।
ईरान के इस कदम से यह भी संकेत मिलता है कि इज़राइल अपने रणनीतिक मकसद में कुछ हद तक सफल होता दिख रहा है। कतर और अन्य खाड़ी देशों के अमेरिका के साथ रक्षा समझौते हैं, जबकि ईरान के रूस के साथ करीबी रक्षा संबंध हैं।
इस कार्रवाई से ईरान ने क्षेत्र में अपने लिए नए खतरे और संभावित विरोधी खड़े कर लिए हैं। ऐसा लगता है कि कई बड़े नेताओं की मौत के बाद हालात और ज्यादा जटिल हो गए हैं, और कुछ विश्लेषकों के अनुसार बाहरी खुफिया एजेंसियों की गतिविधियां भी इस पूरे क्षेत्र को एक नई और खतरनाक जंग की ओर धकेल रही हैं।
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